हम पोस्ट-ग्रैजुएट्स के लिए रेलवे क्यों ख़ास है
जब मेरी पोस्ट-ग्रैजुएट्स(इतिहास में) पूरी हुई, तो मैं थोड़ा खोया हुआ महसूस कर रहा था। इतना पढ़ाई करने के बाद भी समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करूं। प्राइवेट नौकरी? भागदौड़ बहुत, सैलरी कम। टीचिंग? मन नहीं लग रहा था। फिर एक दिन मेरे दोस्त संजय (जिसका MSc है) रेलवे की बात करने लगा, और वहीं से दिलचस्पी शुरू हो गई।
मतलब सोचो भारतीय रेलवे, इतना बड़ा सिस्टम, सरकारी नौकरी, ठीक-ठाक सैलरी और काम का सम्मान। जब मैंने खुद खोजना शुरू किया, तो मैं भी उसमें खो गया। अब जो मैंने सीखा, समझा और जिन गलतियों से गुज़रा, वो सब तुम्हारे साथ शेयर कर रहा हूँ शायद तुम्हारे काम आ जाए।
जब पोस्ट-ग्रैजुएट्स के बाद कुछ समझ नहीं आया
MA के बाद मैं सच में कन्फ्यूज़ था। पढ़ाई पूरी हुई, और अब? पापा बार-बार कहते, “सरकारी नौकरी ले लो बेटा, टेंशन ख़त्म”। शुरू में तो लगा बस यूं ही कह रहे हैं, लेकिन जब गहराई से सोचा, तो रेलवे का ऑप्शन सॉलिड लगा।
संजय ने बताया कि उसके कज़िन ने MBA करके रेलवे जॉइन किया है पक्की नौकरी, घर मिला, फ्री पास, सबकुछ। और सबसे बड़ी बात, हमारे जैसे पोस्ट-ग्रैजुएट्स के लिए इसमें सही पोस्ट्स भी हैं। ऐसा नहीं कि सिर्फ छोटे-मोटे काम करने होंगे।
रेलवे की पोस्ट्स समझने की बात
रेलवे में जॉब्स चार ग्रुप्स में बँटे होते हैं: Group A, B, C, D। थोड़ा बोरिंग लगता है, पर जानना ज़रूरी है:
- Group A: टॉप लेवल अफसर लोग। UPSC जैसी बड़ी परीक्षा से सिलेक्शन होता है। मेरा बस नहीं है वहाँ तक, लेकिन जानना अच्छा लगा।
- Group B: ज़्यादातर प्रमोशन से भरे जाते हैं। डायरेक्ट भर्ती कम होती है। फ़िलहाल तो इस पर ध्यान नहीं दे रहा।
- Group C: यहीं पर मेरी नजर है। जैसे स्टेशन मास्टर, जूनियर इंजीनियर (JE), या जूनियर अकाउंट्स असिस्टेंट जैसी पोस्ट्स। संजय ने NTPC के लिए अप्लाई किया था ग्रैजुएट्स के लिए बढ़िया ऑप्शन।
- Group D: ये ज़्यादातर स्कूल पास वालों के लिए है। ट्रैक वर्कर, हेल्पर वगैरह। MA लेकर ये तो नहीं करूंगा भाई।
मेरी शुरुआत चाय, फोन, और बहुत सारा कन्फ्यूज़न
पिछले साल सोचा कि अब सपना नहीं, एक्शन लेना है। संजय तो पहले से लगा हुआ था। हम दोनों सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर फोन और नोटबुक के साथ प्लान बनाते थे।
पहली बार जब रेलवे की वैकेंसी देखी तो दिमाग घूम गया RRB, CEN, NTPC… सब कुछ नया था। लेकिन धीरे-धीरे चीज़ें समझ आने लगीं। मैंने RRB Mumbai चुना क्योंकि मैं यहीं का हूँ, संजय ने RRB Allahabad लिया।
वैकेंसी ढूँढना जासूसी से कम नहीं
नौकरी ढूँढनी आसान है, अगर पता हो कहाँ देखना है:
- RRB वेबसाइट्स: जैसे मेरे लिए rrbmumbai.gov.in। हर ज़ोन की अपनी वेबसाइट होती है। मैं हर 2-3 दिन में देख लेता हूँ।
- अखबार: पापा Employment News पढ़ते हैं। पुराना तरीका है, लेकिन काम का है।
- दोस्त: संजय ना बताता तो मुझे NTPC के बारे में पता ही नहीं चलता।
- ऑनलाइन वेबसाइट्स: जैसे freejobalert.com। ऑफिशियल नहीं, लेकिन फास्ट अपडेट देती हैं।
एक बार मैंने चूक कर दी एक हफ्ते साइट नहीं देखा, और वैकेंसी निकल गई। अब तो आदत सी बन गई है साइट चेक करने की।
फॉर्म भरना आसान नहीं, लेकिन मुमकिन
जब अप्लाई किया तो लगा जैसे कोई मिशन शुरू कर दिया हो। वेबसाइट पर अकाउंट बनाया, MA की डिग्री, फोटो, साइन सब अपलोड करना पड़ा। पहली बार में तो इंटरनेट ही चला गया बीच में! फिर दीदी का लैपटॉप लेकर दोबारा ट्राय किया।
फीस ₹500 लगी। SC/ST वालों के लिए ₹250 है, शायद। पेमेंट किया, रसीद मिली, फिर इंतज़ार… एडमिट कार्ड का। पता नहीं कितनी बार वेबसाइट चेक किया।
कुछ टिप्स:
- Eligibility देख लो उम्र 18-36 होती है ज़्यादातर पोस्ट्स के लिए।
- फॉर्म ध्यान से भरो।
- फोटो का साइज सही रखो मेरी फोटो बड़ी थी, ₹20 देकर दुकान में ठीक करवाया।
तैयारी स्मार्ट नहीं, लेकिन सच्ची मेहनत
NTPC का टेस्ट दो स्टेज में होता है: CBT 1 और CBT 2। सब कुछ कंप्यूटर पर होता है। सब्जेक्ट्स होते हैं:
- General Awareness: न्यूज, रेलवे से जुड़े फैक्ट्स। संजय कभी-कभी पूछता, “रेल मंत्री कौन है?”
- Maths: 10वीं की मैथमेटिक्स परसेंटेज, टाइम-स्पीड।
- Reasoning: पज़ल्स, पैटर्न्स, सीरीज़ ये मेरा फेवरेट पार्ट था।
मैंने ₹150 में एक बुक खरीदी जिसमें पुराने पेपर्स थे बेस्ट इन्वेस्टमेंट! शुरू में आधे जवाब गलत आते थे, लेकिन प्रैक्टिस से सुधार आया। यूट्यूब पर फ्री मॉक टेस्ट्स भी ट्राय किए।
असली मुश्किल
- कंपटीशन पागलपन है — 10,000 सीट्स के लिए 12 लाख लोग अप्लाई करते हैं।
- Eligibility चेक करना मुश्किल है — हर पोस्ट की अपनी डिग्री ज़रूरत होती है।
- इंतज़ार सबसे भारी है — एग्जाम के बाद महीनों तक कोई अपडेट नहीं।
और हाँ, कुछ पोस्ट्स में टाइपिंग टेस्ट, मेडिकल टेस्ट भी होते हैं।
फिर भी क्यों जारी हूँ?
अभी तक मेरा रिजल्ट नहीं आया (अप्रैल 2025 है) लेकिन मैं रुका नहीं हूँ। संजय का कज़िन रेलवे में है घर, ट्रेन पास, फैमिली को प्राउड फील। मैं भी वही चाहता हूँ।
MA की वैल्यू कभी-कभी बेकार लगती है, लेकिन रेलवे की ये जर्नी उसे फिर से मायने दे रही है।
तो अगर तुम भी पोस्ट-ग्रैजुएट हो, थोड़ा उलझन में हो लेकिन कोशिश करना चाहते हो शुरू कर दो।
RRB साइट चेक करो, चाय पियो, पढ़ाई चालू करो। रास्ता लंबा है, पर मुमकिन है।
शायद अगली बार मैं लिखूं कि कैसे मेरा सिलेक्शन हो गया।
तब तक के लिए, गुड लक हम सब साथ हैं इस सफर में!

Leave A Reply