क्यों रेलवे? एक सपना बहुतों का
मैं एक छोटे शहर में पला-बढ़ा हूँ, और बचपन से सुनता आया हूँ “रेलवे की नौकरी मतलब जिंदगी बन गई!” और सच कहूँ तो ये बात गलत भी नहीं है। भारतीय रेलवे देश का सबसे बड़ा नियोक्ता है। ट्रेनें हर जगह चलती हैं शहरों से गाँव तक, सबको जोड़ती हैं। मेरे चाचा बताते थे कि उनके दोस्त को एक बार कुली की नौकरी मिली थी, और उस एक नौकरी ने उनके पूरे परिवार की ज़िंदगी बदल दी।
सरकारी नौकरी मतलब स्थिरता। वो नौकरी जिस पर आप सालों तक भरोसा कर सकते हो। ऊपर से फायदे भी खूब मिलते हैं फ्री ट्रेन यात्रा, परिवार के लिए मेडिकल सुविधा, और रिटायरमेंट के बाद पेंशन भी! और हमारे जैसे लोगों के लिए, जो मुश्किल से 8वीं पास कर पाए ये एक भविष्य बनाने का मौका है, बिना किताबों में डूबे।
तो जब राहुल ने मुझसे पूछा, “भाई, मैं तो बस 8वीं पास हूँ। क्या मुझे रेलवे की नौकरी मिल सकती है?” मैंने खुद ढूंढकर पता लगाया। और हाँ, मिल सकती है! रेलवे में हर लेवल के लोगों के लिए नौकरियाँ होती हैं 8वीं पास के लिए भी। आइए, इसे थोड़ा आसान भाषा में समझते हैं।
कौन-कौन सी नौकरियाँ होती हैं 8वीं पास वालों के लिए?
सबसे पहले बात करते हैं कि 8वीं पास लोग रेलवे में कर क्या सकते हैं? ऐसी नौकरियाँ ज़्यादातर “Group D” कैटेगरी में आती हैं। ये एंट्री-लेवल की जॉब्स होती हैं, जहाँ ज्यादा पढ़ाई की ज़रूरत नहीं होती, बस मेहनत करने की तैयारी होनी चाहिए।
यहाँ कुछ नौकरियाँ हैं जो मैंने देखी-सुनी हैं:
- ट्रैकमैन (Trackman): रेलवे ट्रैक को दुरुस्त रखना। चलना, ठीक करना, और ट्रेनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- हेल्पर (Helper): मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल या स्टेशन विभागों में सहायक। एक दोस्त वर्कशॉप में हेल्पर है और उसे काम बहुत पसंद है।
- पोर्टर (कुली): स्टेशन पर यात्रियों का सामान उठाना। मेहनत वाला काम है, पर इज़्ज़त और सैलरी दोनों है।
- गेटमैन (Gateman): रेलवे क्रॉसिंग पर तैनात रहते हैं। बहुत ज़िम्मेदार काम।
- चपरासी या ऑफिस असिस्टेंट: दफ्तरों में फाइल ले जाना, छोटी-छोटी मदद करना।
इन नौकरियों में बस 8वीं पास सर्टिफिकेट चाहिए और काम करने की लगन। राहुल की आंखों में चमक थी जब मैंने ये बताया। “सच में? अब कोई एग्जाम नहीं?” मैंने कहा, हाँ! बस खुद को साबित करना है।
कौन कर सकता है आवेदन? ज़रूरी बातें
मैंने जो जाना, वो ये है:
- शैक्षणिक योग्यता: बस 8वीं पास होना ज़रूरी है। कुछ पोस्ट्स में 10वीं या 12वीं मांगी जाती है, पर Group D में 8वीं भी चलेगा।
- उम्र सीमा: 18 से 33 साल तक। अगर आप SC/ST/OBC से हैं तो 5 साल तक की छूट भी मिलती है।
- फिटनेस: यह ज़रूरी है क्योंकि ये नौकरियाँ फिज़िकल होती हैं चलना, उठाना, खड़ा रहना।
- नागरिकता: भारतीय नागरिक होना ज़रूरी है।
राहुल को मैंने जब ये बताया, तो वो राहत की सांस ली। “मतलब मुझे कुछ झूठ नहीं बोलना, कोई और डिग्री नहीं बनानी?” मैंने कहा, बिल्कुल नहीं। खुद को साबित करो बस।
नौकरियों की जानकारी कहाँ मिलेगी?
यह थोड़ा पेचीदा है, पर नामुमकिन नहीं:
- अख़बार: “Employment News” एक साप्ताहिक अख़बार है जो सरकारी नौकरियों की जानकारी देता है।
- वेबसाइट: indianrailways.gov.in और अपने ज़ोन की RRC/RRB वेबसाइट जैसे rrbsiliguri.gov.in या rrbbhopal.gov.in।
- मुँह जुबानी खबरें: छोटे शहरों में तो ये बहुत काम की चीज़ है।
पिछले साल, North Eastern Railway में हज़ारों Group D पोस्ट्स निकली थीं ट्रैकमैन, हेल्पर, सब कुछ! राहुल बोला, “ये मेरा मौका हो सकता है!”
कैसे करें आवेदन: मेरी स्टेप-बाय-स्टेप सलाह
राहुल की मदद से जो सीखा, वो यहाँ है:
- नोटिफिकेशन पढ़ो: वेबसाइट या अख़बार में जब वैकेंसी निकले, ध्यान से पढ़ो कितनी पोस्ट, आखिरी तारीख, योग्यता।
- फॉर्म भरो: ज़्यादातर ऑनलाइन होता है। वेबसाइट पर जाओ, “Apply Now” पर क्लिक करो, डिटेल भरो।
- फीस जमा करो: 500 रुपये के करीब होती है। SC/ST वालों के लिए कम या फ्री भी हो सकता है।
- सबमिट करो और नंबर संभालो: आवेदन का रसीद या नंबर संभाल कर रखो।
हमें बस एक घंटा लगा था ये सब करने में। राहुल डर रहा था, पर मैंने कहा “चिट्ठी भेजने जैसा ही है, बस थोड़ा ज़्यादा।”
उसके बाद क्या? चयन प्रक्रिया
- लिखित परीक्षा (अगर हो): बेसिक मैथ्स, GK, 8वीं लेवल की चीज़ें। थोड़ा रिवीजन कर लो।
- फिज़िकल टेस्ट (PET): मर्दों को 35 किलो उठाकर कुछ मीटर चलना होता है, दौड़ भी होती है। महिलाओं के लिए कम वजन। तैयारी ज़रूरी है।
- दस्तावेज़ जांच: सर्टिफिकेट्स और ID चेक होती है।
- मेडिकल टेस्ट: आँख, कान और हेल्थ चेकअप। कुछ नौकरियों में रंगों की पहचान ज़रूरी होती है।
राहुल अब हर सुबह दौड़ रहा है। कहता है, “अगर सिलेक्शन हो गया, तो चाय मैं पिलाऊंगा!”
सैलरी और सुविधाएँ: क्या वाकई फायदेमंद है?
Group D की शुरुआत 18,000–20,000 रुपये के आसपास होती है। बहुत नहीं, पर स्थिर है। और भी फायदे हैं:
- फ्री ट्रेन यात्रा: परिवार के साथ भारत घूम सकते हो।
- हेल्थकेयर: रेलवे अस्पताल।
- पेंशन: रिटायरमेंट के बाद जीवनभर का सहारा।
मेरे चाचा का दोस्त रिटायर होकर भी आज चैन से है घर बना लिया, बच्चों को पढ़ाया।
रास्ते की मुश्किलें
- प्रतिस्पर्धा जबरदस्त है। लाखों लोग एक साथ आवेदन करते हैं।
- फिजिकल टेस्ट आसान नहीं है। राहुल डरता है, पर मैंने कहा “तैयारी कर, हो जाएगा।”
- इंतज़ार लंबा हो सकता है। जवाब आने में महीनों लगते हैं।
मेरे अनुभव से कुछ सुझाव
- अपडेटेड रहो: हर हफ्ते वेबसाइट और अख़बार देखो।
- फिट रहो: रोज़ थोड़ा दौड़ो, वजन उठाने की प्रैक्टिस करो।
- मदद लो: ऑनलाइन फॉर्म में दिक्कत हो तो साइबर कैफे या दोस्त से मदद मांगो।
- हार मत मानो: राहुल ने दो बार ट्राय किया है। तीसरी बार उसका हो सकता है।
आखिरी बात: ये दरवाज़ा खुला है
ये सब लिखते हुए ऐसा लग रहा है जैसे मैं राहुल के साथ पिछले कुछ महीने फिर से जी रहा हूँ। रेलवे की नौकरी सिर्फ एक नौकरी नहीं ये एक पहचान है, एक ज़िंदगी की नई शुरुआत।
अगर आप भी राहुल जैसे हैं पढ़ाई में ज़्यादा अच्छे नहीं थे, पर मेहनत करने को तैयार हैं तो ये मौका आपका इंतज़ार कर रहा है। एक दिन आप भी किसी और को अपनी कहानी सुना रहे होंगे।

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