सिर्फ 8वीं पास हो? बैंक की नौकरी चाहिए?

कुछ साल पहले, मैं भी तुम्हारी ही तरह सोचता था — कि बस झाड़ू-पोंछा या मंडी में बोरा उठाने जैसी ही नौकरियाँ मेरे लिए बनी हैं। लेकिन फिर बैंक की दुनिया से मेरी मुलाकात हुई, और ज़िंदगी बदल गई। नहीं, मैं कोई बड़ा अफ़सर नहीं हूँ जो करोड़ों गिनता है। मैं एक सीधा-सादा आदमी हूँ जिसे 8वीं पास होने के बावजूद एक पक्की, इज़्ज़त वाली नौकरी मिल गई। आज मैं तुम्हें बताने वाला हूँ कि मैंने कैसे ये किया और तुम भी कैसे 8वीं पास बैंक जॉब्स को पकड़ सकते हो। तो एक चाय बना लो, और बैठो मेरे साथ।

वो दिन जब मैंने बड़ा सपना देखा

ये बात है 2021 की, एक गरम दोपहर का दिन था। मैं अनाज की दुकान पर बोरे ढो रहा था, रोज़ की तरह ₹150 कमाकर घर लौट रहा था। तभी मेरा दोस्त संजय आया। वो अभी-अभी एक बैंक में चपरासी लगा था और उसकी हँसी थम ही नहीं रही थी।

“अरे, यूनिफॉर्म भी दी है बैंक वालों ने!” उसने बड़े फख्र से कहा।
मैंने हँसते हुए कहा, “बैंक की नौकरी और हम? छोड़ ना!”
लेकिन फिर उसने एक लाइन मारी जो दिल में उतर गई:
“सिर्फ 8वीं पास माँगा है, भाई। तू भी कर सकता है।”

उस रात मुझे नींद नहीं आई। क्या सच में मेरे जैसे आदमी के लिए बैंक में जगह हो सकती है? मैंने ठान लिया — पता लगाना है।

बैंक में कौन-कौन सी नौकरियाँ मिल सकती हैं 8वीं पास को?

मैंने काफी रिसर्च की, लोगों से पूछा, अख़बार देखे — और जो पता चला, वो हैरान कर देने वाला था:

  1. चपरासी / ऑफिस हेल्पर
    फ़ाइलें ले जाना, चाय लाना, छोटे-मोटे काम करना। ₹10,000-15,000 तक की तनख्वाह मिलती है, साथ में छुट्टियाँ, पेंशन भी मिल सकती है।
  2. सफाई कर्मचारी
    झाड़ू-पोंछा, डस्टिंग वगैरह। कई बार कॉन्ट्रैक्ट पर होते हैं, लेकिन बैंक में काम का मतलब है स्थिरता।
  3. चौकीदार / गेटकीपर
    दरवाज़े पर निगरानी रखना। छोटे बैंक में ज़्यादा पढ़ाई नहीं माँगते। एक हफ़्ते की ट्रेनिंग और एक कुर्सी — बस।
  4. कैश हैंडलिंग असिस्टेंट (ग्रामीण बैंक)
    कुछ छोटे गाँवों के बैंकों में ऐसा होता है। कैश उठाने में हेल्प चाहिए होती है, ज़्यादा पढ़ाई नहीं, पर ईमानदारी ज़रूरी।

पहली कोशिश – एक सबक

मैं सीधा पंजाब नेशनल बैंक चला गया और पूछा, “भैया, कोई नौकरी है 8वीं पास वालों के लिए?”
क्लर्क ने एक पेम्फलेट पकड़ा दिया — “मल्टी टास्किंग स्टाफ” की वैकेंसी।

ऑनलाइन अप्लाई करना था — मुझे कुछ नहीं आता था। भतीजी ने मदद की। फ़ॉर्म भरा। और फिर इंतज़ार…

तीन महीने बाद पता चला — किसी 10वीं पास बंदे को ले लिया। तगड़ा झटका लगा, लेकिन सीख मिली:
इन नौकरियों के लिए भीड़ ज़्यादा है, और तेज़ी से अप्लाई करना पड़ता है।

बैंक क्या देखता है?

  • शिक्षा: 8वीं पास ज़रूरी, लेकिन 10वीं वालों को ज़्यादा तवज्जो मिल सकती है।
  • उम्र: 18 से 28 या 30 के बीच।
  • भाषा: स्थानीय भाषा आनी चाहिए। मेरे लिए मराठी।
  • व्यवहार: जो बोलो, करो — बिना बहस किए। “यस सर” बोलना सीखो।

छुपी बात ये है — अगर पोस्ट 8वीं पास वालों के लिए है, तो भी कभी-कभी पढ़े-लिखे लोगों को चुन लेते हैं। लेकिन हार नहीं माननी।

ये जॉब्स कहाँ मिलती हैं?

  1. स्थानीय अख़बार: बुधवार वाले एडिशन में “रोज़गार” सेक्शन ज़रूर चेक करो।
  2. बैंक के नोटिस बोर्ड: हर बैंक की दीवार पर नोटिस होता है।
  3. दोस्त-रिश्तेदार: किसी को पूछो, कोई ना कोई जानकारी देगा।
  4. ऑनलाइन: sbi.co.in, Employment News वेबसाइट, या साइबर कैफ़े की मदद लो।

ज़रूरी सलाह: तेज़ी से अप्लाई करो। 1-2 हफ़्ते में पोस्ट बंद हो जाती है।

जिस दिन मेरी किस्मत बदली

2023 के आख़िरी में एक ग्रामीण बैंक में “ऑफिस अटेंडेंट” की वैकेंसी देखी। 8वीं पास माँगा था, और स्थानीय उम्मीदवारों को तरजीह।

फ़ॉर्म भरकर खुद बैंक में जाकर जमा किया। इंटरव्यू में पूछा, “क्यों रखें तुम्हें?”

मैंने कहा: “मेहनती हूँ, ईमानदार हूँ, और टिके रहूंगा।”
दो हफ़्ते बाद लेटर आया: सिलेक्टेड! ₹13,000 महीने की सैलरी और बैंक की कैंटीन में मुफ़्त खाना!

अब कैसा है बैंक में काम करना?

सुबह 8:30 बजे पहुँचता हूँ, झाड़ू लगाता हूँ, फाइलें पहुंचाता हूँ, छोटे-छोटे काम करता हूँ। काम आसान है, और माहौल अच्छा।

नुकसान? तरक्की के लिए पढ़ाई करनी होगी। लेकिन आज की तारीख में जो है, वो बहुत है।

मेरी सलाह तुम्हारे लिए

  • हार मत मानो। मुझे तीसरी बार में काम मिला।
  • सबको बताओ — पड़ोसी, दोस्त, नाई — कोई न कोई काम बताएगा।
  • अपने डॉक्युमेंट्स रेडी रखो — सर्टिफिकेट, फोटो, ID।
  • थोड़ा अंग्रेज़ी और गणित सीख लो — मदद करेगा।
  • छोटे गाँवों के बैंकों में ज़्यादा मौके होते हैं।

2025 में भी ये जॉब्स हैं क्या?

हां, बिल्कुल हैं!
अभी पिछले महीने ही हमारे बैंक में चौकीदार की पोस्ट आई थी — 8वीं पास चाहिए था। अख़बारों में भी MTS और चपरासी की पोस्ट आती रहती हैं।

बस अब ज़्यादा लोग ऑनलाइन अप्लाई कर रहे हैं, इसलिए मोबाइल चलाना सीखो।

क्यों मायने रखता है ये सब

मेरे लिए ये नौकरी सिर्फ पैसे की बात नहीं है। ये इज़्ज़त की बात है। बचपन में सोचा था — बैंक तो “बड़े लोगों” के लिए होते हैं।
लेकिन आज, पासबुक मेरा है, तनख्वाह मेरी है — और मैं भी अब “बैंक वाला” हूँ।

आख़िरी बात

अगर मैं कर सकता हूँ, तो तुम भी कर सकते हो। अख़बार देखो, नोटिस बोर्ड पढ़ो, पूछते रहो। एक दिन तुम्हारा नंबर ज़रूर आएगा।

और हाँ — जब नौकरी लग जाए, मुझे बताना। मैं तुम्हारी कहानी ज़रूर सुनना चाहूँगा।

शुभकामनाएँ! लगे रहो!

Published on April 1, 2025

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