तो बैंक की नौकरी में दिलचस्पी है, है ना?
मैं समझ सकता हूँ – मैं भी कुछ साल पहले बिलकुल तुम्हारी जगह पर था। 12वीं के बाद क्या करना है, ये समझ नहीं आ रहा था। डिग्री नहीं थी, लेकिन मन में कुछ करने की चाह थी। न कोई बड़ी डिग्री, न कोई एक्सपीरियंस – बस एक उम्मीद थी कि कुछ अच्छा होगा। और आज मैं एक बैंक में नौकरी कर रहा हूँ – हां, सिर्फ 12वीं पास होकर भी। आसान नहीं था, लेकिन नामुमकिन भी नहीं।
कहानी की शुरुआत
मुझे आज भी याद है, जब मेरे 12वीं के रिजल्ट आए। 65% आया था – ना बहुत अच्छा, ना बहुत बुरा। लेकिन माँ ने फिर भी लड्डू बनाए। घरवालों ने पूछा – “अब आगे क्या?” कॉलेज का प्लान था, लेकिन मैं कमाना चाहता था। घर की ज़रूरतें भी थीं, और मैं खुद के पैरों पर खड़ा होना चाहता था।
तभी हमारे पड़ोसी अजय भैया, जो बैंक में काम करते हैं, बोले – “बैंक की नौकरी क्यों नहीं ट्राय करता? 12वीं पास वालों को भी लेते हैं।” मैंने पहले तो हँस दिया – बैंक? वो तो “टॉपर” लोगों की जगह लगती थी। लेकिन वो मजाक नहीं कर रहे थे, और यहीं से मेरी सोच बदलने लगी।
मैंने लोगों से पूछना शुरू किया, इधर-उधर पता किया। और पता चला – हाँ, वाकई में कुछ सरकारी और प्राइवेट बैंक ऐसे हैं जो 12वीं पास वालों को भी नौकरी देते हैं। एंट्री-लेवल जॉब्स, लेकिन ठीक-ठाक तनख्वाह और इज़्ज़त के साथ।
कौन-कौन सी जॉब्स होती हैं?
शुरू में मुझे कुछ पता नहीं था। लेकिन धीरे-धीरे सुनते-सुनते समझ आया:
- क्लर्क: बैंक काउंटर पर बैठते हैं, कैश लेते-देते हैं, फॉर्म भरवाते हैं। अजय भैया यही करते हैं – कहते हैं शुरू में टफ लगता है, फिर आदत हो जाती है।
- डाटा एंट्री: टाइपिंग आती हो तो कस्टमर की जानकारी कंप्यूटर में डालनी होती है।
- टेली कॉलर: कॉल करके लोगों से बात करनी होती है, लोन या स्कीम्स समझानी होती हैं। मैं थोड़ा शर्मीला हूँ, तो ये नहीं किया।
- कैशियर हेल्पर: छोटे ब्रांच में कैश या पेपर पास करने का काम।
- स्टेनो: टाइपिंग तेज़ हो या शॉर्टहैंड आता हो, तो ये भी ऑप्शन है (थोड़ा रेयर है)।
ये जॉब्स SBI, पंजाब नेशनल बैंक जैसे सरकारी बैंकों में भी आती हैं और ICICI, HDFC जैसे प्राइवेट बैंकों में भी। सरकारी बैंक में एग्ज़ाम होता है, प्राइवेट में बस इंटरव्यू।
जॉब्स ढूँढना कहाँ से शुरू किया?
तब मेरे पास स्मार्टफोन नहीं था – बस पुराना कीपैड वाला फोन। मेरे पापा हर हफ्ते “रोज़गार समाचार” लाते थे। मैं उसमें बैंक की वैकेंसीज़ ढूँढता था।
एक दिन देखा – “SBI क्लर्क वैकेंसी: 12वीं पास, 60% मार्क्स, उम्र 18-28।” मैंने झट से सबको बताया। अब तो सब ऑनलाइन देखते हैं – sarkariresult.com, SBI की वेबसाइट, या FreeJobAlert जैसी साइट्स। कुछ लोग X (Twitter) पर भी अपडेट्स पाते हैं।
पहली बार आवेदन किया
SBI क्लर्क की जॉब के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना था। मेरे पास कंप्यूटर नहीं था, तो पास के साइबर कैफे गया। वहाँ के अंकल ने मेरी मदद की – नाम, मार्क्स, पता, सब डाला। ₹700 फीस भरी। डर लग रहा था कि कहीं कुछ गलत न हो जाए। लेकिन फॉर्म निकल गया।
कुछ हफ्तों बाद एग्ज़ाम का कॉल लेटर आ गया। अब समझ आया – सिर्फ फॉर्म भरने से नहीं होगा, परीक्षा भी देनी है!
पढ़ाई की तैयारी – थोड़ी टेढ़ी, थोड़ी सीधी
एग्ज़ाम 2 महीने बाद था। उसमें था – इंग्लिश, मैथ्स, रीजनिंग और जनरल नॉलेज। इंग्लिश तो ठीक था, लेकिन मैथ्स मेरा दुश्मन था। अजय भैया ने एक पुरानी किताब दी – “अग्रवाल” सर की। ₹100 की GK किताब भी खरीदी।
हर दिन दोपहर के बाद पढ़ता था, 2 घंटे। मैथ्स में टाइम-स्पीड, परसेंटेज – सब सर के ऊपर से जाता था। एक दोस्त के फोन पर यूट्यूब वीडियो देखे – कुछ ट्रिक्स सीखीं। रीजनिंग मज़ेदार लगी। GK के लिए अखबार पढ़ना शुरू किया।
गलतियाँ होती थीं, सवाल छूटते थे। लेकिन धीरे-धीरे सुधार आया। मेरा सुझाव – एकदम रट्टा न मारो, हर दिन थोड़ा-थोड़ा करो।
एग्ज़ाम वाला दिन – घबराहट और उम्मीद
परीक्षा वाले दिन स्कूल दूर था। बस छूटते-छूटते बची। कंप्यूटर पर परीक्षा थी – डर लग रहा था, कभी ठीक से यूज़ नहीं किया था। लेकिन वहाँ बैठे भाई ने समझाया, और मैंने एग्ज़ाम शुरू किया। इंग्लिश बढ़िया गया, मैथ्स में लड़ा, और जल्दी खत्म कर दिया।
एक महीने बाद रिज़ल्ट आया – पहली राउंड पास कर लिया!
टाइपिंग टेस्ट और इंटरव्यू – और डर, और मेहनत
दूसरी राउंड में टाइपिंग टेस्ट था। मैंने साइबर कैफे में प्रैक्टिस की – धीरे-धीरे 25 शब्द प्रति मिनट तक पहुँच गया। फिर इंटरव्यू कॉल आया – ज़िंदगी का पहला इंटरव्यू!
भाई का शर्ट और टेढ़ी-मेढ़ी टाई पहन कर गया। शीशे के सामने “मैं मेहनती हूँ, सर” बोलने की प्रैक्टिस की। तीन लोग बैठे थे – फैमिली के बारे में पूछा, बैंक क्यों जॉइन करना चाहता हूँ, करेंट अकाउंट क्या होता है।
मैं थोड़ा अटका, लेकिन दिल से जवाब दिया।
और फिर जीत – मिल गई नौकरी!
कुछ हफ्तों बाद चिट्ठी आई – “जूनियर एसोसिएट, SBI।” माँ की आँखों में आँसू थे, और हमने जलेबी खाई। सैलरी ₹19,000 से शुरू हुई, मेडिकल और दूसरी सुविधाओं के साथ।
अब क्या जान पाया हूँ?
- सरकारी vs. प्राइवेट बैंक: सरकारी में सिक्योरिटी होती है, प्राइवेट में तेज़ी से हायर करते हैं पर प्रेशर ज़्यादा होता है।
- बढ़ने के मौके: क्लर्क से शुरू कर सकते हो, फिर पढ़ाई करके प्रमोशन पा सकते हो। मैं भी BA करने का सोच रहा हूँ।
- स्किल्स: कस्टमर से बात करना, कंप्यूटर चलाना, कैश संभालना – सब सीखा मैंने।
2025 में भी मौके हैं
अभी अप्रैल 2025 है, और बैंक अभी भी हायर कर रहे हैं – SBI, Co-operative बैंक, सब। ऑनलाइन चेक करते रहो।
मेरे टिप्स तुम्हारे लिए
- योग्यता चेक करो: ज़्यादातर 60% और 18-28 उम्र चाहिए। SC/ST के लिए छूट भी होती है।
- जगह-जगह ढूँढो: वेबसाइट, पेपर, सोशल मीडिया – नौकरी छुपी होती है।
- पढ़ाई करो, आसान तरीके से: सस्ती किताबें, वीडियो, रोज़ थोड़ा पढ़ो।
- टाइपिंग सीखो: ज़रूरी है, धीरे-धीरे आ जाएगा।
- डटे रहो: मुझे भी कई बार रिजेक्ट किया गया, लेकिन रुका नहीं।
अब कैसा लगता है?
अब मैं लोगों से अच्छे से बात कर पाता हूँ, कुछ पैसे बचा पाता हूँ, और माँ-बाप को मुझ पर गर्व होता है। हां, थकावट होती है, कभी-कभी ग्राहक नाराज़ होते हैं – पर दिल से अच्छा लगता है। आगे अफसर बनने की उम्मीद है।
तो ये थी मेरी कहानी।
अगर तुम 12वीं पास हो और सोच रहे हो आगे क्या – बैंक की नौकरी एक बढ़िया रास्ता हो सकती है। मेहनत लगेगी, इंतज़ार करना होगा, लेकिन मैं कर पाया – तुम भी कर सकते हो।
कोई सवाल हो तो पूछो – मैं यहीं हूँ।
शुभकामनाएं!

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